“बटेसर ओझा ” डॉ. अविनाश झा की कहानियों की पहली किताब है। ये कहानियाँ उस युवा मन की स्मृतियों, बेचैनियों और अपने छूटे हुए गाँव और रिश्तों के प्रति लगावों की संवेदना से बुनी गयी हैं, जो अपनी रोजी-रोटी के चक्कर में अपनी ज़मीन से विस्थापित हो चुका है। इस संग्रह की कहानियाँ पीछे छूट चुके स्मृतियों में बसे हुए गाँवों की कहानियाँ हैं, तो बदलते हुए गाँवों की झलक भी दिखाती हैं। इन कहानियों में पुरानी पीढ़ी की त्रासदी दर्ज़ है। वे परंपराएं और तीज-त्यौहार दर्ज हैं, जो अब गायब हो रहे हैं। देशज भाषा के चयन में, पति-पत्नी के संबंधों के स्पष्ट रेखांकन में, सामाजिक कुरीतियों पर बेबाक और कड़े प्रहार में भी लेखक अपने साहस का सतत परिचय देता है, जो कहानी को शुरु से अंत तक जीवंत बनाये रखती है। बटेसर ओझा कहानी संग्रह की कहानियां मैथिली ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं जिसमे देशी, बज्जिका, मैथिली कहावतो और शब्दों का भरपूर इस्तेमाल हुआ है। इसके बावजूद यह मैथिल क्षेत्र के अलावा अवध, भोजपुरी, बुंदेलखंड और रुहेलखंड मे बड़े प्यार से पढ़ी जा रही है।