Ghadighar ke Samay Prahari | घड़ीघर के समय प्रहरी

हमारी दुनिया के समानान्तर बसी है घड़ीघर की...

हमारी दुनिया के समानान्तर बसी है घड़ीघर की रहस्यमयी दुनिया…घड़ीघर की घड़ियाँ और उन्हें नियंत्रित करने वाले समय-प्रहरी ही हैं जो हम सबके जीवन से जुड़ी प्राकृतिक,भौगोलिक,सामाजिक और राजनैतिक गतिविधियों को संतुलन में रखने का काम करते हैं। लेकिन मनुष्यों के लालच और शैतानी शक्तियों के काले कारनामों के चलते समय-प्रहरियों के काम में आने लगीं हैं अड़चने और धरती पर होने लगीं है रोज नई गड़बड़ियाँ! ऐसी ही उठा-पठक के बीच घड़ीघर में प्रवेश होता है गरु यानि गरुड़ का, जिसके साथी हैं एक मेमना – बहादुर और एक लंगड़ा कौवा- काको। शुरुआत में गरु को न तो घड़ीघर की अनोखी दुनिया पर भरोसा आता है और न ही उसे समय-प्रहरियों की मदद कर खुद को हीरो साबित करने में कोई दिलचस्पी जागती है! लेकिन गुजरते वक़्त के साथ खुलने लगती हैं रहस्य की परतें…और नालायक गरु समय-भक्षक से भिड़कर बन जाता है समय-प्रहरियों का मददगार! दरअसल गरु का घड़ीघर में पहुंचना और बिना किसी चमत्कारिक शक्ति के उसके साधारण से असाधारण बनकर उभरने तक के इस सफ़र में हर मोड़ पूर्व नियोजित थाI घड़ीघर की इस फैंटेसी दुनिया को रचा ही गया है इसे पढ़ने वालों को प्रतीकों के जरिए जीवन में संतुलन की अहमियत समझाने के लिए। तो चलिए पलटते हैं इस अनोखी दास्तान के पन्ने…कहीं देर न हो जाए, क्योंकि घड़ी की टिक-टिक जारी है!

Publish Date

2024-02-23

Published Year

2024

Total Pages

144

ISBN 10

9392723741

ISBN 13

978-9392723742

Format

Paperback

Country

India

Language

Hindi

Dimension

19.81 x 12.9 x 1 cm

Weight

230gm

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