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भोला को भी अपनी दादी की दादी की दादी की...
अगर कभी हमें जादुई अंगूठी मिल जाए तो मज़ा आ जाए, हम सभी कभी ना कभी ऐसा सोचते हैंI भोला को भी अपनी दादी की दादी की दादी की जादुई अंगूठी मिल जाती हैI पर ऐसा क्या होता है कि वह माचिस की डिबिया जैसे नन्हे घरों में रहने वाले बौनों के देश में बंदी बना लिया जाता हैI
उसकी तलाश में उसका दोस्त ‘मुरब्बा’ उसे ढूँढने निकलता हैI रास्ते में उड़ने वाली मछली,बोलने वाली नटखट नाव, गोलमटोल राजा “कद्दू” और मज़ाकिया बंदर भी मज़ेदार शरारतें करते हुए मुरब्बा की सहायता करते हैंI ये कहानी बताती है कि दोस्ती अनमोल होती है और सच्चा दोस्त हर मुसीबत में हमारा साथ देता है!